गिर रहे लोगों के भाव लिखो..


Love And Peace We All Want

Love And Peace We All Want

दिल कहता है,
फिर कोई कहानी लिखो,
ख्वाबों से रंगीन जवानी लिखो,
बीते दिनों के फसाने लिखो,
अपने प्रिये की तारीफें लिखों,
अपनों से बस दिल की बातें लिखो।

फिर कहता है, नहीं, आज कुछ और लिखो,
जो घट रहा आज, वो सुनामी लिखों,
पंथों में विचलित, मानव की जाति लिखों,
धर्मांध में जलते दुनिया के लोग लिखो,
हर रोज लूटती बेटी का, तुम दर्द लिखो,
बढ़ती महंगाई में, गिर रहे लोगों के भाव लिखो।

अब और इतिहास नहीं, बस ‘आज’ लिखो,
कोड़े ख़्वाब ही नहीं, कड़वी सच्चाई भी लिखों,
जो जल रहे लोग, उनकी जुबानी लिखों,
हो बुझाने की कोशिश ऐसी कहानी लिखों,
बेशर्म, बेलग़ामों को तमांचे लिखों,
बढ़ती महंगाई में, गिर रहे लोगों के भाव लिखो।

हर राश्ते की अपनी है अहमियत लिखों,
राश्तों से बड़ी है मंजिल, ये हकीकत लिखों,
टकड़ा जाने से मंजिल मिलनी नहीं,
सो सुक़ून, शांति की सबसे अपील लिखों,
अपनों का अपनों से उठ रहा विश्वास लिखों,
बढ़ती महंगाई में, गिर रहे लोगों के भाव लिखो।

सन्नी कुमार

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Dil kahta hai,
phir koi kahaani likho,
khwabon se rangeen jawaani likhon,
beete dinon ke phansaaney likhon,
apne priyeee ki tarifein likhon,
apnon se apni kahaani likhon..

phir kahta hai, nahin kuchh aur likho,
jo ghat rahaa aaj wo sunaami likhon,
panthon mein vichlit maanav ki jaati likhon,
dharmandh mein jalate duniya ke log likhon,
har roj lootati beti ka dard likhon,
badhtee mehangayee mein gir rahe logon ka bhaaw likho..

ab aur itihaas nahi, ab aaj likhon,
kode khwab hi nahi, kadawi sacchai bhi likhon,
jo kal rahe log unki jubaani likho,
ho bujhaane ki koshish aisi kahaani likho,
besharm, belagaamo ko tamaache likho,
badhtee mehangayee mein gir rahe logon ka bhaaw likho..

har rashte ki apni hai ahmiyat, likho,
rashto se badi hai manjil ye haqeeqat likho,
takda jaane se manjeel milni nahi,
so sukoon aur shanti ki sabse apeel likho,
apno ka apno se uth rahaa viswas likho,
badhtee mehangayee mein gir rahe logon ka bhaaw likho..

बाद मेरे दुनिया को समझा लेना


IMG_4506ग़र हो सके तो,
अपनी यादों को समझा लेना.
जो दलीलें दिल को दी,
वो याद, इनको भी करा देना।।

ठीक नहीं इनका हर वक़्त आना,
ठीक नहीं आकर, पलकों को भिंगो जाना.
ग़र हो सके तो,
अपनी यादों को समझा लेना।।

मेरे टूटने के और भी बहाने है,
तुम जिक्र अपना, बचा लेना.

मैं रूठा हूँ जग से,
तुम्हें पाने की हठ में,
जो ना मिली तुम,
बाद मेरे दुनिया को समझा लेना।।

सन्नी कुमार