खरौना में शिक्षा का माहौल


जैसा की आप सब को पता है की पिछले सप्ताह पंचायत भवन के प्रांगण में गाँव में शिक्षा के माहौल विषय पर चर्चा हुयी थी जिसमे छात्रों ने अपने विचार रखे थे, आज इस पोस्ट से उन्ही विचारों को साझा कर रहा हूँ, कमेंट बॉक्स में आप सब भी अपने विचार रख सकते है..

कक्षा दस के दीपक कुमार कहते है कि गाँव में शिक्षा का माहौल औसत है और कई चीजें है जिन्हें सुधारा जा सकता है. दीपक कहते है कि शिक्षा पे कहीं सामूहिक चर्चा नही होती, गाँव में पुस्तकालय है पर सालो से बंद है और जब खुलता है तो बारात घर के रूप में अब समय है की छात्रों के लिए पुस्तकालय के ताले खोल दिए जाए.
वही ग्रेजुएशन की पढाई कर रही अन्नू कुमारी का कहना है की गाँव शहर के समीप है और यही वजह है की यहाँ शिक्षा का माहौल अच्छा है, सक्षम लोगों के पास गाँव के अन्दर और बाहर कई विकल्प है पर गरीबों के लिए भी अब शिक्षा पहले जितना मुश्किल नहीं है, सरकार ने शिक्षा पे जोड़ दिया है जिसका फायदा विद्यार्थियों को मिलता है.
सातवीं कक्षा में पढ़ रहे आदित्य कुमार कहते है की गाँव में शिक्षा का माहौल बहुत अच्छा है, यहाँ ३ मिडिल और १ हाई स्कूल है जहाँ अच्छी पढाई होती है और वह आगे पढ़ लिख कर डॉक्टर बनाना चाहते है.
वही आशा कुमारी, पुतुल कुमारी गाँव ने गाँव में शिक्षा के माहौल को लेकर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी और अच्छा बताया.
रवीना खातून कहती है की गाँव में शिक्षा का माहौल अच्छा है और विद्यालय के शिक्षक भी अच्छे है, उसे ख़ुशी है की वह खरौना में रहती है.
नवम वर्ग के छात्र नितेश कुमार कहते है की गाँव में शिक्षा के लिए अनुकूल माहौल है, हाई स्कूल में अच्छी पढ़ाई होती है और गाँव में कई कोचिंग सेंटर भी है जिससे छात्रो को शिक्षा के लिए शहर जाने की आवश्यकता भी नहीं होती.
ग्रेजुएशन के छात्र रवि कुमार कहते है की गाँव में सामाजिक स्टार पर शिक्षा का माहौल सहयोगात्मक नहीं है और वो चाहते है की पढ़ लिख कर एक अच्छा माहौल बनाएं जहाँ शिक्षा पर सामूहिक चर्चा हो, और इसी उद्देश्य से पंचायत भवन या पुस्तकालय का उपयोग कर एक माहौल बनाने की कोशिश करेंगे.
नवम के छात्र सिद्धार्थ कुमार कहते है की शिक्षा का माहौल औसत है किन्तु आज भी समाज में बहुत से ऐसे परिवार है जहाँ शिक्षा को महत्त्व नही दिया जा रहा, माता-पिता शिक्षा को नजरंदाज करते हुए बच्चों को जल्दी काम पर लगा देते है, बेटियों की शादी आज भी कम उम्र में कर दी जाती है जो गलत है. शिक्षा समय की समय की मांग है और सबको शिक्षा को महत्त्व देना चाहिए.
सुमित कुमार उर्फ़ चीकू कहते है की गाँव में शिक्षा का माहौल सकारात्मक नहीं है, शिक्षा सामाजिक चर्चा का विषय नहीं है, लोग आपकी १०० बुराई करेंगे पर १ हल नहीं बताएँगे. गाँव में ३ मिडिल १ हाई स्कूल है पर वह गाँव के स्कूल के माहौल से अवगत नहीं है चुकी उनकी पढ़ाई गाँव से बाहर हो रही है. सुमित कहते है की सामाजिक स्तर पे एक सकारात्मक माहौल बनें तो बात बने.
मयंक पराशर के अनुसार गाँव में शिक्षा का माहौल अच्छा है और यहाँ दसवी तक के छात्र के लिए सारी सुविधाएं है. गाँव में कई डॉक्टर, इंजिनियर, शिक्षक है. गाँव में निरक्षरों की संख्या कम है पर गाँव में ऐसे बहुत से लोग है जो बच्चों को स्कूल भेजने के बदले काम पर लगा देते है, कई लोग जब स्कूल से पैसा मिलने वाला होता है तभी बच्चे पर ध्यान देते है की स्कूल जा रहा है की नहीं और बाद में फिर उन्हें बच्चो के शिक्षा की फिकर नहीं होती.
ग्रेजुएशन, अकाउंट की छात्रा सोनम कुमारी कहती है की गाँव में शिक्षा का माहौल सामान्य है, गाँव में कई सरकारी विद्यालय है और १०वीं तक की पढ़ाई गाँव में ही संभव है किन्तु यहाँ पढ़ाई उतना अच्छा नही है, मिडिल स्कूल की प्राध्यापिका की शिकायत करती वो कहती है की स्कूल में भोजन तो मिलता है पर अच्छी शिक्षा नहीं और यही कारण है की बच्चे टिफिन बाद अक्सर स्कूल से भाग जाते है. गाँव में नयी कोशिश करने वालों के लिए नकारात्मक माहौल है और सृजनात्मक कोशिशों को ठुकराना दुर्भाग्य है. वह पढ़-लिख कर बैंक में नौकरी पाना चाहती है और अपने माता पिता और गाँव का नाम रौशन करना चाहती है.
ग्रेजुएशन के ही छात्र सुशांत कुमार गाँव में शिक्षा के माहौल पर कहते है की गाँव में शिक्षा के लिए पर्याप्त संसाधन है, नवोदय विद्यालय, हाई स्कूल, कईप्राथमिक और मध्य विद्यालय के अलावा गाँव में पुस्तकालय भी है जो बहुत कम गाँव में होता है बाबजूद इसके गाँव में इन संसाधनों का उपयोग बेहतर तरीके से नही हो पा रहा.विद्यालय के शिक्षको को बस वेतन से मतलब होता है, और आज छात्र अपने शिक्षको की उतनी इज्जत भी नही करते, जो गलत है. वो हाल ही में पिट गये हेडमास्टर की भी चर्चा करते है और टिफिन में बच्चों के भागने के लिए शिक्षा को बोझिल होना मानते है. सुशांत कहते है की शिक्षकों को चाहिए की छात्रो को शिक्षा के लिए उत्साहित करें, भोजन तो मिल ही रहा है, अच्छी शिक्षा भी मिले तो बात बनें. सुशांत आगे कहते अहि की गाँव में कोशिश करने वालों को नकारा जाता है जो गलत है, जो समाज को कुछ देना चाहते है उनको रोका जाता है, पुस्तकालय का उद्देश्य भी ख़तम है और हम सबको इस माहौल को बेहतर बनाना चाहिए, और हम सब कोशिश भी कर रहे है. इन सभी मित्रो का आभार जो हमारे साहत है….खरौना बदल रहा है ;) :)

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पार्लियामेंट पहुंचने का शॉर्ट टर्म कोर्स


चाय पीने वालों को भी निराश होने की जरूरत नहीं, आपको अपनी नौकरी छोड़कर चायवाला बनने की सलाह नहीं देंगे. चाय वाले चाय बनाते हुए सैटेलाइट, डीटीएच, इंटरनेट और मोबाइल के इस्तेमाल से चाय को और टेस्टी बनाया करेंगे और आप भी चाय पीते हुए आराम से उसमें सैटेलाइट, डीटीएच, इंटरनेट और मोबाइल का जायका लीजिए! मिला न मोदी जी का नायाब तोहफा.

हमेशा की तरह एक बार फिर हमारे बहुचर्चित ‘पीएम इन वेटिंग’ नरेंद्र मोदी जी चर्चा में हैं. वह इस बार खूनी पंजे के खतरों से आगाह नहीं कर रहे हैं बल्कि फुटपाथ पार्लियामेंट बनाने के लिए चर्चा में हैं. घबराइए मत केजरीवाल की तरह यहां हंगामा नहीं मचने वाला, भगदड़ नहीं मचेगी और आपके हाथ-पैर भी सलामत रहेंगे. दरअसल मोदी जी साधारण चाय बनाने वालों को हाइटेक चाय बनाने की सलाह दे रहे हैं.

पीएम इन वेटिंग के साथ चाय पीना कोई छोटी बात नहीं लेकिन मोदी जी की दानवीरता देखिए वे अपनी बड़ी सी ‘पीएम इन वेटिंग’ की हस्ती को चाय की दुकान वालों के साथ बैठकर चाय पीने के लिए कुर्बान कर रहे हैं. तो अब चाय की स्टॉल पर चाय बनाते हुए चायवालों, सतर्क हो जाओ! ‘पार्लियामेंट पहुंचने का शॉर्ट टर्म कोर्स’ सीखना है या नहीं!

चाय पीने वालों को भी निराश होने की जरूरत नहीं, आपको अपनी नौकरी छोड़कर चायवाला बनने की सलाह नहीं देंगे. चाय वाले चाय बनाते हुए सैटेलाइट, डीटीएच, इंटरनेट और मोबाइल के इस्तेमाल से चाय को और टेस्टी बनाया करेंगे और आप भी चाय पीते हुए आराम से उसमें सैटेलाइट, डीटीएच, इंटरनेट और मोबाइल का जायका लीजिए! मिला न मोदी जी का नायाब तोहफा. तो मोदी जी से नाराज मत होइए कि वे बस हर चीज चाय वालों के लिए ही कर रहे हैं. आपके लिए एकदम नायाब हाइटेक चाय का तोहफा है भई! मजे लीजिए इस बेहतरीन चाय के!
अब चर्चा करते हैं ‘चाय पर चर्चा’ के फायदों की

narendra-modis-chai-pe-charcha-campaignइसके केवल यही दोतरफा फायदे नहीं बल्कि चौतरफा फायदे हैं. चाय बनाने के हुनर में माहिर मोदी जी 2 करोड़ लोगों को न केवल चाय बनाने वालों को पार्लियामेंट में आने के गुर सिखाएंगे बल्कि चाय के साथ इंग्लिश की चीनी कैसे तैयार की जाती है यह भी सिखाएंगे. इस चाय चर्चा पर वे बड़े ही भोले अंदाज में अपने अंग्रेजी के शब्दों को चाय की चीनी में घोलकर बताते हैं कि किस तरह वे चाय बनाते हुए आगे आए और पार्लियामेंट तक पहुंच गए.

डूबते को मजबूत खंभे का सहारा चाहिए

भले ही अभी तक मोदी जी प्रधानमंत्री बने नहीं हैं लेकिन प्रधानमंत्री की दावेदारी लेना भी कोई छोटी बात नहीं! चार बार लगातार दूध संपदा में धनी गुजरात को अपनी मीठी चाय से प्रभावित करना और मुख्यमंत्री बनना भी आसान नहीं है. इसलिए ‘चाय की चर्चा’ मीटिंग में मोदी जी अपने ‘देश की मनी’ को ‘ब्लैक मनी’ बनाकर बाहर रखने वालों के इन काले कारनामों को कैसे हराया जाय और कैसे उस ब्लैक मनी को व्हाइट मनी कर देश में पाई-पाई रुपया वापस लाया जाय यह भी सिखाएंगे. इतना ही नहीं इस शॉर्ट टर्म कोर्स में पर्लियामेंट तक पहुंचने के लिए किस प्रकार की शक्कर और गुड़ इस्तेमाल कर लोगों को प्रभावित करना चाहिए, किस प्रकार वादे करने चाहिए यह भी सिखाया जाएगा. तो सभी चाय वालों, तैयार हो जाओ! अगर फुटपाथ पार्लियामेंट बनाना है तो मोदी जी की ‘हाइटेक चाय चर्चा’ में शामिल होना है.

 

Originally posted in Dainik Jagran

Boost Her Hope For A Better Tomorrow


A week before i read about Milap initiative on IndiBlogger. The Hope Project, a campaign by Milap to inspire urban masses towards empowering rural women through small contributions. What makes this project special is that the women in this case are ex-Devadasis and the possibility of self-reliance through entrepreneurship is a ray of fierce hope for them.

Devdasi GalI have not heard of Devadasi before but after reading different web sources i came to know about Devdasi System. It’s An ancient practice in India, the Devadasi (meaning: ‘servant of God’) system involved dedicating a girl, as young as 5-6 years of age, to the temple Goddess. This meant that she would spend her entire life serving the temple and was not allowed to marry anyone else. The system was abused by the rich and the powerful who began to force the young Devadasis to sleep with them.

Over the years, the Devadasis were reduced to being incorrectly termed ‘temple prostitutes’. This merciless practice, though illegal and outlawed, still exists in certain small towns of India and its stigma continues to cling to the women who attempt an escape. Because of the social stigma around their roles, employment opportunities are denied to them. It is a vicious cycle where future generations too, are drawn into this ruthless system.

After reading about devdasi and The Hope Project i felt to write about the brave ladies who has been tortured before on the name of Pseudo religion and still suffering to meet their daily livelihood.  This system is still in practice and few days back The Supreme Court had directed Karnataka Chief Secretary to take all steps to prevent women from being forced to become ‘devadasis’.

I accept the fact that we can’t fix all the things at once, we can’t help all Devadasi but yes our little effort can change someone’s life so don’t you feel/urge to Boost Her Hope For A Better Tomorrow..?

Your loan will help Sumitra Kamble and Group to expand buffalo rearing businesses

Here i am introducing you Sumitra Kamble and Group, she is a resident of Ghataprabha in Belgaum district. Just like many other former Devadasi women, she has never been to a school. Her entire earnings come from selling milk products obtained from the two buffaloes that she has raised for many years. This allows her to just make ends meet. Even sending her two children to school is more challenging than she would expect. At times, she becomes anxious by the thought that she is just an illness away from financial strain. She sees that the time to change things for the better is now, when she has the will and the enterprise to achieve financial security. She needs a loan not just to supplement her aging buffaloes but to increase her savings. Joining her in her mission are Bhagavva Kamble, Champa Mayanavar, Champa Kamble and Jayashree Lambugol, whose stories mirror the each other.  Together, they will encourage and support each other on the road to financial independence.

How Can You Boost Her Hope.?

Sumitra Kamble, Bhagavva Kamble, Champa Mayanavar, Champa Kamble and Jayashree Lambugol, are  now jointly seeking a loan of Rs 48,750.00 to meet their objective to buy more buffaloes and goats to add to the strength of their existing herds. Your loan can help them to meet their objective. Click Here To Contribute http://milaap.org/fund/sumitra-kamble-and-group/2037?&referrer_id=9166

-Sunny Kumar

I’m not only Indian.


Only Indian Or Indian First

Only Indian Or Indian First

I’m a poor student of science still I believe that I can understand the most of its tough concepts but sorry to say that I failed to understand my own constitution which says us that we all are equal and only Indian. I can’t understand that how can we all are equal when we have been categorized and getting reservation on the name of caste and community? I am not alone who has same feeling but there are many of my friends with same questions. Well I will come about our questions later but would like to share this news first with you which gives us some hope and more confusions.

Yesterday J&K High court in its verdict, once again reminded us that nation has no religion and we all are only Indian. Courts given instructions to Government and Election commission to stop those people who are trying to divide this nation on the name of religion. Court headed by Mr. Muzaffar Ali was giving his verdict to Kashmiri Hindus and given reference of Indian constitution that we all are only Indian and as per law we cannot add our nationality with religions.

I agree with the court that we should avoid dividing Indians on the name of Religion, Language, Caste and community. But unfortunately this is neither easy nor near to reality, Fact is most of us are feeling proud on what we are and we are associated with our religion, caste and community and so one order cannot make that expected change and that is when our own constitution has created so many confusions with their citizens’ identification and their rights.

It might possible that court is aware about NaMo’s Hindu Nationalist Remark and also about all ongoing communal clashes. Well, I do agree with Narendra Modi or anyone if he associated his belief with his nationality. I also proudly say that I am a Hindu nationalist and there is nothing wrong in it. Fact is that most of us are associated with any of religion and all religions teach us to live a better life and inspire us to make a better community so there is nothing wrong in it.

I also agree with the court’s point that government and election commission should stop those who are trying to divide country on the name of religion/caste/language or community. But we should not oppose or stop those who are uniting/ preaching/ inspiring us to make a better country and taking help of religions.

Now government/court and all who is part of this law making should clear our point and to come with a more clear and more real constitution which would be fairer for all and there would be nothing like general, SC, ST OBC or they should also add Religion because both are reality and in practice and if you ignore you mean only arrogant.

Can we ask?

  • Why not our court gives strong instructions to government to stop Caste based Reservation? If reservation is our need then it should be given to those who are needy Indians not a Needy SC/ST/OBC. I mean to say reservation should be given on the poverty level. It alarms unbiased minds that our constitution has defined a certain percentage of reserved seats in almost all fields and government has not an exact number of us that how many of us belong to general/SC/ST or OBC? (Without knowing the number don’t know how do they define percentage)
  • Why not election commission stopped political parties when they announce reservation before poll? (In UP state election SP, Congress and BSP were advocating for Muslim Reservation.)
  • How can anyone say that he is only Indian when constitution has divided him in Minority/Majority or in General/SC/ST or in OBC??
  • And What’s wrong in it if I say I’m Indian first but I am not only Indian, I’m a General Hindu Indian? It not only sounds more close to real but also clears some doubts. Don’t you think so?

Online Jobs You Can Start From Home


To run our own business  we need many of things like deep knowledge of the business we are going to start, prior skill in related fields, sufficient resource, product selling ability and most importantly capital. Without these things we cannot run our own business and this is again a black truth that we all do not have enough capital and we want to run business to earn money so what we all can do?

In this age of technology while doing job we can start our own part time work like work from home or café, where we will be our own boss and will work for our own. The benefit of these part time jobs are that we do not need to change our regular job but have to make some extra effort for some extra money. Well most of us have no problem with working for few more hours but real questions start from where we will get this part time jobs? Well there are many of jobs but question is what do you know, what is your expertise and how you can contribute? Once you will come to know your potential half of your questions will met to their answers on the same day. Those who love to teach can give tutions, Those who have some expertise in services can offer their services in neighborhood and people like us who are good at nothing but exploring this web world and those fingers are in an affair with computer keys can try these options.

Online Jobs You Can Start From Home

  1. Google AdSense- Google is increasing day by day and it will increase always this is what Techies believes. Google’s Adsense is the no. 1 opportunity for those who work online and making money. Out of every 100 people who are making money online are making money from Google Adsense and so we can say it is alone the winner in this Race. People who work as a part time earn $100 to $2500 per month.
  2. Online Surveys- Online surveys are one of the best jobs without investing. People like us who want to earn some extra cash. There are hundreds of sites which provide such jobs.
  3. Micro Jobs on MTurk- Due to the nature of this job, this is categorized as data entry job by the people who are working with mTurk and making money. mTurk  is more popular in India than any other country. If you are looking for some trusted part time programs from home where you can make 8000 – 10,000 INR per month by working 1-2 hrs a day then this is highly recommended program.
  4. Get Paid to Click Ads- This is perhaps one of the simple and easy online income option. You can work from home, office or even an internet café.You can even termed this as mini part time job because even if you work for 20 or more sites, you are not going to spend more than 30 minutes.
  5. Make Money Blogging- Blogging is considered as hottest online job because it opens the doors to hundreds of income opportunities. If your blog is popular, you have chance to earn from AdSense, affiliate marketing, selling your ad space, other networks like AdSense & so many. {(Blogging is creating a blog and writing on your blog on regular basis, be it daily, weekly or even monthly. Creating a blog is damn easy & once you are learned the ABC of this, you will find it more interesting. Just check how the bloggers are finding it one of the best challenging fields to get fame & money.}
  6. Freelancing- It is one of the best option for people who want to use their skills by working from home for others without working in a company. They want to be their own boss & so they are known as freelancers. There are hundreds of sites where you can work as a freelancer. Either you need the skills or you can acquire if you want to earn money. These are top 10 freelancing sites where you can register as a freelancer and check if there is something for you.
  7. Part Time Seller on Fiverr or eBay- eBay & Fiverr both are highly reputed sites if you are looking for part time jobs to sell something whether you have it or not. Yes, these sites have proved so much that, people are left their jobs and making full time income working from home.
  8. Affiliate Marketing- This is another highest earning opportunity but its bit difficult online job if you are a beginner. Affiliate marketing means becoming affiliate with any online advertiser and promote their product so that whenever someone makes a free signup or purchases from the advertiser’s website then he/she gets the commission.
  9. Make Money on Youtube and Facebook- There is a boom in the social media world. With the popularity of sites like Facebook, Twitter & Youtube. There are great chances of making money from Youtube or Facebook ot Twitter.

No Shame in Scam?


Acheivement of Congress : Scam, Scam and Scam

Acheivement of Congress : Scam, Scam and Scam

[The way UPA has ruled this country, The way our PM is silent on coal block’s missing files, The way CBI is not giving results and The way girls and soldiers are not safe in this country, is torturing the real Indians. I doubt when these politicians behave,.I had called Mayavati a big fool when she inaugurated her own statue and i have doubt on congressi’s mind the way they tried their best to pass the much awaited National Food Security Bill on Rajiv’s B’day.

Dear Congressi, people of India have given you task to work for country not for your family. If you people are there to promote your family then please Remember what happened in the past. Please don’t play with nation’s sentiment and stop looting this country. We have suffered, felt shame when you looted in commonwealth, we are suffering with telecom monopoly now as you have cancelled many of companies registration and now established companies have increased in their tarrifs. It was you people who looted in 2G, and it is we, The common Indian, suffering.

When a normal family is busy to earn bread for them you people are busy in your scams. Just a shame on you UPA 1 and UPA 2. ]

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हमारे पैसों से गाँधी-नेहरु के पुतले लगते है,
बिल देश का पर बेशर्म, दिन वो अपने चुनते है..
कोई चारा खा गया, कोई कोयला अब भी खाता है,
और विरोधी, विपक्ष खुश अपने हिस्सों से हो जाता है..

दिन भर काम कर के हम मजदूरी इतनी पाते है,
की चलता घर अपना, हम इतने में खुश हो जाते है,
और ये संसद बंद करा कर, नेता हमारे कहलाते है,
कभी 2g , कभी आदर्श, कभी कोयला तक खा जाते है..

शर्म नहीं आँखों में इनके कि माँ भारती को है लूटते,
देश मांगे जवाब पर इनके मौन नहीं टूटते,
खुलता जब भी मुंह इनका देश को है बाँटते,
फिर है ऐसी क्या बेबसी हम नेता इन्हीं को मानते..?

 

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Humare paiso se gandhi-nehru k putle lagte hai,
bill desh ka par besharm, din wo apne chunte hai..
koi chaara kha gaya, koi koyla ab bhi khaata hai,
aur virodhi vipaksh, khush apne hisson se ho jata hai..
.
din bhar kaam kar ke hum majduri itni paate hai, ki chalta ghar apna, hum itne me khush ho jate hai..
Aur ye sansad band karaa kar neta kahlaate hai, kabhi 2g, kabhi adarsh to kbhi koyla tak kha jate hai..

sharm nhi aankho mein ki maa bharati ko lutate,
desh mange jawab par inke maun nhi tutate,
khulta hai jab bhi munh inka,
ye desh ko hi baantate,
phir hai aisi kya bebasi,
ki hum neta inhe ko mante…

Be a leader and stop following these fake faces.