ये सर्द सुबह है धुंध भरा…


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Life iz Amazing

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सबकुछ मानो जमा परा,
धुंध ने धरती को आकाश बना,
चहुओर बादल है भरा,
इन बादलो में देख पाना,
था घर से निकलते वक़्त का भूल मेरा।

इस सर्द की कठुरता का,
खैर मुझे कोई मलाल नहीं,
इन बादलों के पार नयी दुनिया है,
दिल को ये विश्वास है,
मेरा है वो कर रही इन्तेजार,
उससे मेरी ये आस है।

उसी दुनिया से मिलने की ख्वाहिश,
इन बादलों में लेके आयी है,
बढ़ रहा मंजिल की और,
उम्मीदे के पर लिए हुए,
अगले पल में ही मिल जाएगी वो,
ऐसी ही कुछ हसरत लिए हुए।

इन रास्तो से पहले भी गुजरा हूँ,
मै हजारों बार,
पर धुंध से ऐसी सजावट,
देखी है पहली बार।
नयी दुनिया की राह बादलों से, सोचा था,
आज हो रहा ऐतबार।

वो रोज के मिलने वाले आज,
इन बादलों में दिखे नहीं,
चिड़ियों के चहकने की आवाज,
आज हमने…

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तेरी यादें, तेरी बातें, तेरा चेहरा ए सनम..


Life iz Amazing

teen-couple-embracingतेरी यादें, तेरी बातें,
तेरा चेहरा ए सनम..
होता तन्हां या भीड़ में कहीं,
होते है ये संग सनम..
तेरी यादें, तेरी बातें,
तेरा चेहरा ए सनम.

घोले मिश्री कानों में जो,
वो तेरी बातें है सनम..
धुप में भी जो भिंगोये,
वो तेरा प्यार है सनम..
तेरी यादें, तेरी बातें,
तेरा चेहरा ए सनम..

है जिसका इन्तेजार,
जो हर पल पास,
वो तेरा प्यार है सनम..
खोने की जिसमें है हसरत,
जिससे सारे ख्वाब सजाये,
वो तेरी चाहत है सनम..

तेरी नजरें, तेरी जुल्फें,
तेरा चेहरा ए सनम..
दिखता खाली, या गूम सा कहीं,
उलझा हूँ इनमें सनम,
तेरी नजरें, तेरी जुल्फें,
तेरा चेहरा ए सनम..

होता खोया ख्वाब में कहीं,
या की तेरी यादों में मैं,
मुस्कुराता हूँ उन पलों में,
होती जब तुम संग सनम..
तेरी नजरें, तेरी जुल्फें,
तेरा चेहरा ए सनम..

न कहो तुम वो सुनु मैं,
ऐसा रिस्ता है सनम,
पाऊं तुझको, खोऊ उनमें,
है ये हसरत…

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बिहारी हूँ


बिहारी हूँ,
मेहनत करता हूँ, पर पंजाब में,
फैक्ट्री लगाता हूँ, पर मौरीसस में,
आईएएस, आईपीएस, नेता खूब बनता हूँ,
और जब शांति से जीना हो तो दिल्ली, बंगलौर, मुंबई शिफ्ट करता हूँ..

Life iz Amazing

sunny-kumarबिहारी हूँ,
मेहनत करता हूँ, पर पंजाब में,
फैक्ट्री लगाता हूँ, पर मौरीसस में,
आईएएस, आईपीएस, नेता खूब बनता हूँ,
और जब शांति से जीना हो तो दिल्ली, बंगलौर, मुंबई शिफ्ट करता हूँ..

बिहारी हूँ,
हर साल छठ में अपने घरवालों से मिलने आता हूँ,
उनको मुंबई, गुजरात, दिल्ली की समृद्धि सुनाता हूँ,
मिलता हूँ बिछड़ो से, कोसता हूँ नेताओं को,
फिर छुट्टी ख़तम, ट्रेनों में ठूस-ठूसा कर प्रदेश लौट जाता हूँ..

बिहारी हूँ,
बुद्ध, महावीर, जानकी से लेकर
चाणक्य, मौर्य, अशोक आर्यभट तक पे इतराता हूँ..
पिछड़ गया हूँ प्रकृति पथ पर,
पर राजेन्द्र, दिनकर, जयप्रकाश की बातों से खुद को खूब लुभाता हूँ..

बिहारी हूँ,
पढ़ लिख कर बिहार छोड़ पलायन का राश्ता चुनता हूँ,
राजनीती भी समझता हूँ पर मैं परदेशी वोट गिरा नही पाता हूँ,
ठगा जा रहा हूँ वर्षों से फिर भी जाति मोह से उपर नही उठ पाता हूँ,
खुद कुछ खास कर नही…

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Happy Valentine Day


You are lucky if you don’t need words to say your feelings. Let me be honest and tell you all that today i wished my both love, My wife and My Ex.. To wish my wife i don’t need any words, even she doesn’t believe in this materialistic   /cosmetic day but on other side i had to type a lot to wish my Ex…
On this day, which is believed to be lover’s day may you all find your soul mate with whom you can make your Life Amazing.
Love to All.
Sunny Kumar

Bhoj (भोज)


खरौना की कई विशेषता है, कई बातें है जो हमें राज्य के अन्य गाँवों से बेहतर बनाती है पर मुझे जो हमेशा से भाता रहा है वह है गाँव में होने वाला भोज. भोज को लेकर गाँव में खूब उत्साह होता है, आज भी लोग भोज से ही किसी समारोह की सफलता को आंकते है और हमारे गाँव का भोज विशेषकर दही चुरा तो मशहूर ही है.. खरौना के लोगों का दही-चुरा से प्रेम भी जगजाहिर है..तो आइये आज उसी भोज की कुछ अच्छी बातें यहाँ आप सब से बांटते है.

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kharaunaखरौना की कई विशेषता है, कई बातें है जो हमें राज्य के अन्य गाँवों से बेहतर बनाती है पर मुझे जो हमेशा से भाता रहा है वह है गाँव में होने वाला भोज. भोज को लेकर गाँव में खूब उत्साह होता है, आज भी लोग भोज से ही किसी समारोह की सफलता को आंकते है और हमारे गाँव का भोज विशेषकर दही चुरा तो मशहूर ही है.. खरौना के लोगों का  दही-चुरा से प्रेम भी जगजाहिर है..तो आइये आज उसी भोज की कुछ अच्छी बातें यहाँ आप सब से बांटते है.
खरौना, २२ टोला का गाँव,  जहाँ समय के  साथ भोज के तौर तरीके भी खूब बदले है पर इसका क्रेज और दही प्रेम अब भी वही है, हाँ पहले की तरह एक एक हरीया(मिटटी का बर्तन जिसमे १० से १२ लिटर दूध का दही जमा सकते) दही खाने वाले धुरंधर अब नही है और न ही खुद से भोजन…

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Activities in Kharauna – November’15


सफलता और सृजनता के पूरक शिक्षक, समाजसेवक श्री देवनन्दन चौधरी का परिचय


स्वनाम धन्य महान शासक भारत द्वारा अपनी महिमा से मण्डित इस देश का इतिहास अत्यन्त सम्पन्न रहा है। राम-कृष्ण की इस भरत भूमि पर एक से बढ़कर एक वीर पैदा हुए, महात्माओं की यह भूमि जिसने कई सौ सालों की गुलामी की बेड़ियां तोड़ गरीबी, लाचारी असमानता से लड़ते हुए आज फिर से हमें आत्म निर्भर बनाया है उसमे लाखों लोगों की मेहनत लगी, आइये आज इस पोस्ट के माध्यम से हम और आप जानते है ऐसे ही एक वयोवृद्ध हस्ती के बारे में जिनका जीवन हम ग्रामवासियों के लिए एक प्रेरणा है..
श्री देवनन्दन चौधरी, जिनका जन्म 31 अक्टूबर 1928 को पिता नत्थू चौधरी एक साधारण किसान और माता सुधा देवी गृहिणी के यहां हुआ। एक साधारण कृषक परिवार(खरौना डीह) में जन्मे श्री चौधरी ने अपने जीवन का बहुत सा अंश भारतीय स्वतन्त्रा प्राप्ति से लेकर समाजसेवा में समर्पित किया है। 1948 में देवघर से प्रवेशिका परीक्षा तथा पुनः 1952 में साहित्य भूषण की उपाधि प्राप्त कर आपने शिक्षा क्षेत्र में अपनी भूमिका स्वीकार की। सन् 1950 में आपने रामबाग मुजफ्फरपुर से शारीरिक परीक्षा प्राप्त किया और उसी वर्ष श्रीमती सुदामा देवी से आपका विवाह हुआ।
बचपन से ही आपके मन में समाजसेवा, जनकल्याण की भावना तथा बड़ों के प्रति सम्मान एवम् छोटे के प्रति स्नेह का भाव देखा गया। राष्टीय जाग्रति ऐसी रही कि 1942 में कक्षा 7वीं के छात्र के रूप में आपने पताही मिडिल स्कूल में अंग्रेजों के कोड़े खाना स्वीकार किया। 1946 में शिक्षक प्रशिक्षण प्राप्त कर 1949 से प्राथमिक विद्यालय शाहपुर पट्टी(साहेबगंज) में शिक्षण का कार्य प्रारम्भ किया। इसी क्रम में कांग्रेसी नेता श्री नवल किशोर सिंह की गुरुता से प्रभावित होकर 1954 से शिक्षक संघ का सेवक बनकर समाज सेवा में तल्लीन हुए। स्थानीय गणमान्य लोगों के सानिध्य में रहते हुए 1964 तक अंचल मंत्री के पद पर सक्रिय रहे। ततपश्चात् पिताजी के मृत्यु उपरांत कांग्रेस प्रतिनिधि के आग्रह पर श्री आनंदी ठाकुर के सहयोग से राजकीय मध्य विद्यालय रुसुलपुर में सन् 1965 से कार्यभार ग्रहण किया। सेवा में पदोनत्ति के बाद 1975-86 तक राजकीय मध्य विद्यालय छपड़ा(अंचल- काँटी) में कार्यरत रहते हुए 31 अगस्त 1986 को अवकाश प्राप्त किया।
औपचारिक सेवा से मुक्ति प्राप्त कर ग्रामीण परिवेश में रहते हुए शिक्षा का विकास के प्रति आकर्षित हुआ और इसी श्रृंखला में एक महाविद्यालय की स्थापना का प्रस्ताव रख यथाशक्ति सहयोग कर श्री बृजनंदन चौधरी विंड देवी महाविद्यालय खरौना में अध्यक्ष पद ग्रहण कर निरन्तर बालक-बालिकाओं को प्रोत्साहित करते रहने का प्रयास करते रहे। किसी भी सामजिक एवम् धार्मिक उत्थान में अपना सहयोग देना आपको अच्छा लगता है। जीवन के 88वें सर्द में पांव रखते हुए भी आप गाँव में हो रही सृजनात्मक कोशिशों में आते रहे है।
आज जो एक अलग कोशिश हो रही है गाँव में उसको भी आपने अपना दर्शन और अपना आशीर्वाद दिया जिसके हम आभारी है। हम आपके स्वस्थ, सुखी एवम् समुन्नत दीर्घजीवन की कामना करते है।
हम है
खरौना के नवयुवक

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