नरेंद्र मोदी – एक मात्र विकल्प


नरेंद्र  मोदी – एक मात्र विकल्प
दोस्तों २०१४ का लोक सभा चुनाव कुछ ही महीनो में शुरू होनेवाला है और देश के दोनों बड़े दलों के साथ साथ क्षेत्रीय दलों ने भी तैयारिया शुरू कर दी है, वैसे में क्या आपने अपनी तैयारियां शुरू की है? यह चुनाव देश के आने वाले पांच साल तो तय करेगा ही बल्कि यह भी सुनिश्चित करेगा कि आने वाले दिनों में भारत विश्व पटल पे  किस तरह जाना जायेगा.
आज जब हमारे सभी पडोसी देश लगभग हमारे खिलाफ खड़े है और हम बस उन्हें मूक बने देख रहे है, भ्रस्टाचार,  दंगे, बलात्कार की खबरें रोज सुर्ख़ियों में होती है वैसे में आपको वोट देते वक़्त यह जरूर तय करना होगा कि भारत को आज किसी लोकप्रिय छवि, साफ़ चरित्र के व्यक्ति की ही नहीं बल्कि एक कुशल प्रशाशक कि जरूरत है जो कश्मीर, अरुणाचल में तैनात सैनिको का मान, दुश्मनो को जवाब देकर  बढ़ा सकें, जो इस देश की संस्कृति को सुरक्षित रखते हुए भारत को फिर से विश्व गुरु बना सकें। जो असम, हैदराबाद, मुज़फ्फरनगर, गुजरात, कश्मीर के दंगो को, जो दिल्ली, बैंगलोर, दिलसुखनगर, पटना, पुणे और ना जाने कितने जगहो पे हुए बम ब्लास्ट को रोकने का विश्वास दिला  सके और आतंकवादियों और धार्मिक गुरु कि खाल ओढ़े आतंकवादियों  को सजा दे सके. देश का प्रधानमंत्री ऐसा हो जिसका नाम लेते हुए खुद पे अभिमान हो और उसके काम करने का तरीका निस्पक्ष हो. नेता बराबरी की बात आरक्षण के आधार पर न करें और बिजली, पानी मुफ्त दे न दें, कश्मीर देने की बात करने वाला मूढ़ न हो.
दोस्तों आने वाले दिनों में आपको बहुत से विकल्प गिनाये जायेंगे, बहुत से नाम होंगे जिसे मीडिया एक और विकल्प कहकर पुकारेगी, सभी पार्टियां आपको नये नये वादों से रिझाने कि कोशिश करेगी, और मीडिया का सारा ध्यान हमेशा कि तरह खबरें बेच कर  TRP कबढने पर होगा, तब ये हमको निश्चित करना होगा कि क्या हम फिर से हाथ पर भरोसा करेंगे? क्षेत्रीय पार्टियों का कोई भरोसा नहीं और अगर वो राष्ट्रिय दलों के साथ मिलकर वोट नहीं लड़ते या फिर चुनाव पूर्व अपना रुख स्पष्ट नहीं करते फिर उनपर यकीं करना मेरी नजरों में तो बस बेवकूफी ही होगा। मीडिया आज आम आदमी पार्टी  को  शक्तिमान कि तरह पेश कर रहा है पर आम आदमी कि नीति स्पष्ट नहीं ना ही उनके पास कोई अनुभवी कुशल प्रशाशक है न उनकी दूरदर्शिता पर मुझे यकीन। पानी मुफ्त, बिजली के दाम कम करके उन्होंने अपना वादा पूरा किया है पर वो उसी भ्रष्टाचारी कांग्रेस के गोद में बैठ गए जिनके खिलाफ उन्हें लड़ना था. ऐसा ही कुछ हाल क्षेत्रीय दलों का भी होगा अतः एक बार विचार ले इस बार क्या वाक़ई में है कोई विकल्प या आप भी मानते है नरेंद्र  मोदी – एक मात्र विकल्प

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