क्यूंकि बहरी, भ्रष्ट है सरकार, अब सरकार ये बदल दो..


मिला मौका है इस बार, कि इतिहास अब बदल दो.
न करनी परे फिर से शिकायत, ये हालत अब बदल दो..
मिली आजादी विरासत में हमें, इसे स्वराज में अब बदल दो,
क्यूंकि बहरी, भ्रष्ट है सरकार, अब सरकार ये बदल दो..

अपने नहीं ये हमारे,
ना इनको देश का ही है ख्याल..
ये तो तुर्कों से है लुटेरे,
बुनते हर घडी लूट की चाल..

जनमानस की छोड़ ही दो आप,
इनको माँ भारती का भी ख्याल नहीं..
पकरे गए खरबों की चोरी में,
फिर भी आँखों में है इनके शर्म नहीं..

बख्शी थोड़ी इज्जत है,
जो कह दीया हमने सरकार,
जो दिल से पूछो तो कहूँ,
है यही असली गद्दार..

कभी हमें रंगों में बाँटते,
कभी दीन, दिशा के नाम पर,
देश का दुर्दशा कर दिया,
वोट पाते गाँधी के नाम पर..

इनको नहीं दीखते सपने स्वराज के,
इनको नहीं करनी अब चर्चा, लोकपाल की.
ये तो गूंगे, बहरे लोग है,
क्यूँ इनसे उम्मीदें बेकार की..

यही समय है सोच लो अब आप,
किसको जीते हो,
दिल से हो हिंदुस्तानी,
या अधिकार बस वोटों का रखते हो..

है जमीर जागा हुआ,
या आप भी उनसे हो,
जो नहीं तो फिर क्यूँ,
आप विज्ञापनों पे मरते हो?

आँखे खोलो देखों,
किस हाल में माँ भारती,
जो कर सके सुपरिवर्तन,
अब उसी का साथ दो..

है मुझें उम्मीद खुद से,
ऐतबार आप पे करता हूँ..
इसीलिए अपनी मन की बात,
आप तक सीधे रखता हूँ..

मिला मौका है इस बार, कि इतिहास अब बदल दो.
न करनी परे फिर से शिकायत, ये हालत अब बदल दो..
मिली आजादी विरासत में हमें, इसे स्वराज में अब बदल दो,
क्यूंकि बहरी, भ्रष्ट है सरकार, अब सरकार ये बदल दो..

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