ऐ हवा तू खुद में उसकी महक समेट ला…!!!


Lonely1ऐ हवा तू  खुद में उसकी महक समेट ला,
वो निकली जो होगी संवर के, तू उसकी आहट समेट ला..
कर तू मुझपे एहसान आज, मिलके उसके पास से आ,
कि रूठी जिंदगी मुझसे है यार, कुछ साँसे उससे उधार ला..
ऐ हवा तू  खुद में उसकी महक समेट ला..

मुझे आदत सी हो गयी है उसकी,
तू उसको खुद में बसा के ला..
जो न करेगा तू इतना,
तू भी भुला दे मुझको जा..
ऐ हवा तू  खुद में उसकी महक समेट ला..

कि बिन उसके कुछ भी मंज़ूर नहीं,
कि कोई खबर तो उसकी ला,
साँसे थक गयी है मेरी,
तू उसकी छुअन तो ले के आ..
ऐ हवा तू  खुद में उसकी महक समेट ला…!!!

images (1)वो छुपी न जाने क्यूँ हमसे,
शायद मिलने भी आज न आये वो,
चलें मेरी साँसे इन्तेजार में उसके,
ऐ हवा तू तू उसको खुद में बसा के ला..

उससे दूरी है दिल को मंजूर नहीं,
कहीं बोझिल साँसों से धड़कन थम ना जाये,
मै मिलूँ उससे, कर पाऊं उसका इन्तेजार,
ए हवा तू खुद में उसकी छुअन तो ला..

ऐ हवा तू खुद में उसकी महक समेट ला,
वो निकली जो होगी संवर के, तू उसकी आहट समेट ला..
कर तू मुझपे एहसान आज, मिलके उसके पास से आ,
कि रूठी जिंदगी मुझसे है यार, कुछ साँसे उससे उधार ला..
ऐ हवा तू खुद में उसकी महक समेट ला….

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