मानवता हो रही शर्मसार..


 

अभी पिछले कुछ दिनों से जो खबरें आ रही है देश के अलग अलग हिस्सों से वो बेहद चिंताजनक ही नहीं अमानवीय भी है। पिछले महीने पूरा देश जिस लड़की के लिए दुआ कर रहा था, जिसके लिए लड़ाई लड़ रहा था, जिसकी चिता ने भी एक उम्मीद जगाई थी वो जल्द ही टूट गया, और कल समाचार पत्रों में देल्ही की तीन और लड़कियों से हुए बलात्कार और बलात्कार की कोशिश ने राजधानी को वापिस से शर्मसार कर दिया। स्पष्ट है ये घटनाएं नैतिंक पतन का नतीजा है पर बुरी खबरें यही नहीं रूकती और खबर हैदराबाद से आता है जहाँ एक नेता अकबरुद्दीन ओवैस, नेता कम बीमार ज्यादा, अपना मुंह खोलता है और दुनिया को साबित करता है की उसकी बुद्धि कितनी भ्रष्ट हो गयी है। पूरा हिंदुस्तान ओवैसी का विरोध करता तो ज्यादा उचित था पर कुछ लोग ऐसे भी थे जो उसको समर्थन दे रहे थे और उंगलिया औरो की ओर करके खुद को उनसे बेहतर बताने की कोशिश में थे, खैर इस जगह से थोड़ी सी राहत मिली और भला हो उनलोगों का जिन्होंने इस पागल के विरुद्ध केस दर्ज कराके उसको कोर्ट तक घसीटा है।

दो दिन पहले ही पाकिस्तान के जवानो द्वारा किये गए भारतीय सैनिकों की नृशंस हत्या के लिए भारत सरकार पाकिस्तान पे दवाब बना रहा था की आज सबसे बुरी, अमानवीय समाचार झारखण्ड के लातेहार जिला से आया है जहां माओवादियों ने हमारे दस सी.आर.पी.एफ जवानो का अमानवीय तरीके से हत्या की है, माओवादियों ने न केवल जानवरों की तरह जवानों के शरीर को क्षतिग्रस्त किया बल्कि उनके शरीर में  I.E.D(improvised explosive  device) बम लगाए। मावोवादियों का ये चरित्र कोई नया नहीं है किन्तु जिस तरह से उन्होंने एक मृत शरीर में बम लगाए वो चिंताजनक है और उम्मीद है की भारतीय सरकार इनके खिलाफ एक असरदार कदम उठाएं।

इन ख़बरों से यही पता चलता है की किस तरह भारतीय ही भारतीय को न केवल क्षति पहुंचा रहे है बल्कि अपना अमानवीय चेहरा दिखाकर एक सामान्य व्यक्ति की चिंता बढा रहे है। जहाँ देश के राजधानी में हमारी बेटी, बहिन सुरक्षित नहीं है, जहाँ देश के कुछ नेता जन मानस की सेवा पूरी तरह से भूल चुके है, जहाँ इस देश के कुछ भटके हुए लोग इस देश के संसाधनों का उपयोग करते है और यहीं के सपूतो को मार रहे है, देश के विरुद्ध साजिश कर रहे है। मुझे एक भारतीय होने के नाते गुस्सा आता है, गुस्सा आता है उन भाइयों पे जो अपना चरित्र भूल गए है, उन लोगों पे जो अपनी वोट के लिए देश को बाँट रहे है, गुस्सा आता है उन लोगो पे जो देश के भटके हुए युवाओं को भटका कर कभी मावोवाद के नाम पे कभी जेहाद के नाम पर उनसे उनके ही भाइयों का खून करवा रहे है। तरस उन पढ़े लिखे मूर्खों पे भी आता है जो बड़ी बड़ी विश्विद्यालयों से शिक्षा तो ग्रहण कर लेते है पर अपना आधार भूल जाते है और इन हरकतों की पूरी तरह निंदा करने के बजाये इनके पीछे भी तर्क निकाल लेते है। जो लोग भी मावोवादियों का समर्थन करते है उनमें केवल गरीब, उपेक्षित नहीं है, बल्कि उनको चलाने वाले धूर्त नेता ओछी मासिकता रखते है, ऐसा मेरा यकीन हो गया है इन घटनाओं के बाद।

जहाँ पिछले दो वर्षों से हम महँगाई और भ्रष्टाचार से लड़ रहे थे, एक उम्मीद में थे की कुछ अच्छी खबरें आएँगी, पर हाल में जो भी इस देश में हुआ है हम सब भूल गए है और सुरक्षा सबसे बड़ा मुद्दा बनके रह गया है। दुःख है कि  हमें खतरा पाकिस्तान या चीन से नहीं अपने ही विक्षिप्त देशवालों से है।

-सन्नी कुमार

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s