ये सर्द सुबह है धुंध भरा…


foggy dayये सर्द सुबह है धुंध भरा,
सबकुछ मानो जमा परा,
धुंध ने धरती को आकाश बना,
चहुओर बादल है भरा,
इन बादलो में देख पाना,
था घर से निकलते वक़्त का भूल मेरा।

इस सर्द की कठुरता का,
खैर मुझे कोई मलाल नहीं,
इन बादलों के पार नयी दुनिया है,
दिल को ये विश्वास है,
मेरा है वो कर रही इन्तेजार,
उससे मेरी ये आस है।

उसी दुनिया से मिलने की ख्वाहिश,
इन बादलों में लेके आयी है,
बढ़ रहा मंजिल की और,
उम्मीदे के पर लिए हुए,
अगले पल में ही मिल जाएगी वो,
ऐसी ही कुछ हसरत लिए हुए।

इन रास्तो से पहले भी गुजरा हूँ,
मै हजारों बार,
पर धुंध से ऐसी सजावट,
देखी है पहली बार।
नयी दुनिया की राह बादलों से, सोचा था,
आज हो रहा ऐतबार।

वो रोज के मिलने वाले आज,
इन बादलों में आज दिखे नहीं,
चिड़ियों के चहकने की आवाज,
आज हमने सूनी नहीं,
मैं अकेला इस वीरान सड़क पे,
कोई साथी पथिक दिखा नहीं।

है इतनी ठण्ड तुम कहाँ जा रहे हो बेटा,
घर से निकलते वक़्त माँ ने यही पूछा था,
उनसे बचने के लिए,
गुरूजी ने बुलाया उनको बताया था,
हाँ था ये गलत पर क्या करें,
ये शरद कठोर इसको भी,
आज ही एकदम से आना था,
मैं कैसे कह पाता माँ से,
इस शीतलहर में मै वादा निभाने जा रहा।

निकल चूका हूँ घर से अब मैं,
ख्वाबों की और मै बढ़ रहा।
मिल जायेंगी अगले मोर खड़ी वो,
ये सोच के मै मुस्का रहा।

 

-सन्नी कुमार

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