गरीबी मुबारक होखे!


हाले में अपना एगो सहकर्मी से हमार बातचीत भइल जवन बंगाल के भीतरी भाग के रहे वाला ह. ओकरा से बातचीत के दौरान हमरा पता चलल कि ऊ आठ सदस्यन के अपना परिवार के एकलौता कमाऊ सदस्य बा. अउर ईमानदारी से अपना मूलभूत जरूरत के पइसा अपना पास रखला के बाद बांचल राशि ऊ हर महीना घरे भेज देला. पूछला प ऊ हमरा बतवलस कि ओकरा माई के अलावा दूगो बड भाई के परिवार अउर एगो बहिन ओकरा आमदनी प आश्रित बाडी. माई अउर छोट बहिन के आश्रित होखल त हम समझ सकेनी, बाकिर दूगो बड भाई अउर उनकर परिवार कइसे ओकरा प निर्भर हो सकेला. पूछला प ऊ बतवलस कि ओकर भाई लोग कबहीं आपन आजीविका चलावे खातिर कवनो काम ना कइले अउर भविष्य में भी अपना गुजारा खातिर कवनो काम ना करिहें. हालांकि एकर वजह जादा कौतूहल से भरल बा- उनका लगे तीनगो बीपीएल कार्ड बा- एगो माई खातिर अउर दूगो अउर कार्ड दूनो भाई के परिवार खातिर बा. अउर बीपीएल (गरीबी रेखा के नीचे) कार्ड प उनका गरीबी उन्मूलन के विविध योजना सब के तहत सरकार से काफी खाद्य पदार्थ मिल जाला. अउर जवन कुछ भी कमी रह जाले ओकर भरपाई ऊ लोग आपन मामूली जमीन से करेलन. जब उनका सब जरूरत पूरा हो रहल बिया त फेर उनका कमाये के का जरूरत बा? स्कूली शिक्षा अउर अस्पताल के खरचो मुफ्त में मिल रहल बा, हालांकि एकरा में से कुछ भी ठीक नइखे. एह लोगन खातिर ओहिजा ना त कवनो खतरा होला ना ही कवनो आकस्मिकता, त फेर उनका आपन जीविका चलावे खातिर काम करे के कवन जरूरत बा?

अगर ई पर्याप्त ना भी होखे त सरकार बीपीएल परिवार के मुफ्त मोबाइल देवे के योजना बनवले बिया. ‘हर हाथ में फोन’ के नाम से लोकप्रिय योजना के तहत संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार बीपीएल परिवारन में तकरीबन 60 लाख फोन बांटे के फैसला लेले बिया. एकरा अलावा हर महीरा 200 मिनट मुफ्त कॉल करे के सुविधा भी होई. पूरा परियोजना प लगभग 7000 करोड़ रुपया खर्च होखे के अनुमान बा. एकरा से जादा उनका का चाहीं? का हमनी गरीबी के बनवले राखे के वातावरण तइयार नइखे क रहल? अउर हमार उत्तर बा कबो ना. एकरा अलावा उचित अवसर के अभाव के कारण एह दुनिया में के होई जे मिल रहल मुफ्त उपहार के छोडी अउर संघर्ष करत रही? दुविधा ई बा कि नीति के शर्त प का केहू के न्यूनतम मूलभूत जरूरत सब के पूरा करे के बारे में सोचे के चाहीं ताकि जिनगी के न्यूनतम जरूरत के सीमा तय कइल जा सके चाहे एकरा उनका प छोड़ देवे के चाहीं कि केहू आपन व्यवस्था खुद करेला. हमरा ऊ कहाउत इयाद करे दीहीं जवना में कहल गइल बा कि- आवश्यकता आविष्कार के जननी ह. एकरा अलावा ई मुफ्त मोबाइल फोन सेवा ओट बैंक के राजनीति करे के दोसर सस्ता जनवादी तरीका ह एकरा में गरीबी कम करे के कवनो मंशा नइखे. इतिहास बतावेला कि कवनो देश क्रांति चाहे सुनियोजित हस्तक्षेप के माध्यम से ही गरीबी से निजात पावे में सफल भइल बा. यूरोप अउर अमेरिका एह मामला में उदाहरण बा.

हालांकि यूरोप अउर अमेरिका दूनो में गरीबी दूर करे खातिर जवन तरीका अपनावल गइल रहे- चाहे रक्तरंजित क्रांति के माध्यम से होखे चाहे शुद्घ रूप से कडा मेहनत क के होखे ऊ सोच समझ के अपनावल गइल रहे अउर अपना आप में खास रहे!

एह दुनिया में कहीं भी ओह तरीका से गरीबी के बढ़ावा ना दीहल गइल बा जवना तरे हम अपना देश में देले बानी. अउर कई साल बाद भी हमनी के देखे के पड़ रहल बा कि गरीबी के आंकड़ा जस के तस बनल बा. अउर ई अइसने बनल रही काहेंकि हमनी गरीबी के कायम रखे खातिर बहुत सफलता के साथे ओइसन वातावरण तइयार कइले बानी.

(Source- The Sunday Indian)

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